संविधान रक्षक न्यूज़ चैनल संवाददाता अवधेश कुमार
फतेहपुर। जनपद फतेहपुर के थाना खखरेरू क्षेत्र के ग्राम कबरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव की रहने वाली गरीब अनुसूचित जाति की विधवा शकुंतला देवी पत्नी स्वर्गीय सीताराम ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने उनकी निजी जमीन पर जबरन पाइप डालकर पानी की निकासी का रास्ता बना लिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकियां दी गईं और शिकायत करने पर भी न्याय नहीं मिला।
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस, ग्राम प्रधान और उच्च अधिकारियों से कई बार शिकायत की। पुलिस अधीक्षक फतेहपुर को भी लिखित प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। लेकिन आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि गरीब, अशिक्षित और असहाय महिला की मजबूरी का फायदा उठाकर उससे कथित रूप से दबाव में सुलहनामा लिखवा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में समझौते के कागज पर हस्ताक्षर करने पड़े। उनका आरोप है कि उनकी सहमति स्वतंत्र नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों और दबाव का परिणाम थी।
दस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी जमीन पर अवैध रूप से पाइप डालकर पानी निकासी शुरू कर दी। विरोध करने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और जान से मारने तक की धमकी दी गई। इसके बावजूद न तो पाइप हटाई गई और न ही आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई हुई।
यदि किसी गरीब दलित महिला से उसकी इच्छा के विरुद्ध दबाव में सुलहनामा कराया गया है, तो यह केवल एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था, प्रशासनिक निष्पक्षता और कमजोर वर्गों के अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।
आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक गरीब दलित विधवा को न्याय मांगने की कीमत दबाव में समझौता करके चुकानी पड़ेगी? क्या प्रशासन पीड़िता की शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगा, या उसकी आवाज़ यूँ ही दबा दी जाएगी?
पीड़िता शकुंतला देवी ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित दबाव में कराए गए सुलहनामे की जांच कराने, अवैध रूप से डाली गई पाइप हटवाने तथा दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।
(यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना शेष है।)


