- विश्वविख्यात नौहाख्वान की पहली हाज़िरी बनी आकर्षण का केंद्र, कई जिलों से उमड़ा जनसैलाब, पूरी रात चलता रहा मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला
फतेहपुर। मोहर्रम की रूहानी फिज़ा, “या हुसैन” की गूंजती सदाएं, सीना-ज़नी करते अज़ादारों का समंदर और दर्द से लबरेज़ नौहाख्वानी… गुरुवार की रात खागा तहसील क्षेत्र के ग्राम उमरपुर गौंती (काज़ीपुर) में ऐसा ही मंज़र देखने को मिला। इमाम हुसैन (अ.स.) के बीसवां के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय मजलिस एवं नौहाख्वानी कार्यक्रम में हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुके सफीर-ए-अज़ा सैय्यद अमीर हसन आमिर की मौजूदगी ने पूरे माहौल को ग़म-ए-हुसैन में डुबो दिया। उनके दर्दभरे नौहों ने हजारों अकीदतमंदों की आंखें नम कर दीं और हर शख्स मातम करने पर मजबूर हो गया।
सूफी मकसूद बाबा एवं उनकी मजबूत टीम के संयोजन में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम इस वर्ष अपनी भव्यता और ऐतिहासिक उपस्थिति के कारण विशेष चर्चा में रहा। आयोजन में उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों अज़ादार पहुंचे। शाम से ही लोगों का काफिला काज़ीपुर की ओर बढ़ने लगा था और रात होते-होते पूरा पंडाल अकीदतमंदों से खचाखच भर गया। जगह कम पड़ने पर लोग आसपास की सड़कों और खुले मैदानों में भी बैठकर कार्यक्रम सुनते रहे। जैसे ही सैय्यद अमीर हसन आमिर मंच पर पहुंचे, पूरा पंडाल “या हुसैन” और “लब्बैक या हुसैन” की सदाओं से गूंज उठा। उन्होंने अपने मशहूर नौहे “हुसैन आपको हिन्दोस्तां बुलाता है…” से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी बुलंद, दर्दभरी और असरदार आवाज़ ने कुछ ही पलों में पूरे माहौल को ग़म-ए-हुसैन में डुबो दिया। नौहे के हर मिसरे पर अज़ादारों की आंखों से आंसू छलकते रहे और सीना-ज़नी का सिलसिला तेज होता गया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई दर्दभरे नौहे पेश किए। हर कलाम के साथ माहौल और अधिक रंजो-ग़म में डूबता चला गया। बड़ी संख्या में मौजूद अज़ादारों ने एक साथ मातम कर कर्बला के शहीदों को पुरसा पेश किया। नौहाख्वानी के दौरान कई लोग भावुक होकर रो पड़े। पूरी रात इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 वफ़ादार साथियों की शहादत का ज़िक्र होता रहा और कर्बला की कुर्बानी का पैग़ाम लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में बड़ागांव के नौहाख्वान उस्मान अली ने अपनी विशिष्ट शैली में नौहे पढ़े, जबकि जेहिदपुर के नौहाख्वान हसन वारसी ने भी अपने दर्दभरे कलाम पेश कर अज़ादारों को भावुक कर दिया। दोनों नौहाख्वानों के कलामों पर बड़ी संख्या में लोगों ने मातम किया और इमाम हुसैन (अ.स.) की बारगाह में पुरसा पेश किया। पूरे कार्यक्रम की निज़ामत हिंदुस्तान के मशहूर नाज़िम अनीस रज़ा जायसी ने की। उन्होंने अपने प्रभावशाली अंदाज़ में कार्यक्रम का संचालन करते हुए कर्बला की कुर्बानी, इंसानियत, सब्र और हक़ की राह पर डटे रहने के संदेश को श्रोताओं तक पहुंचाया। उनकी बेहतरीन निज़ामत ने पूरी महफिल को यादगार बना दिया। सैय्यद अमीर हसन आमिर को सुनने और देखने के लिए फतेहपुर के अलावा कौशाम्बी, प्रयागराज, बांदा, कानपुर, रायबरेली, अमेठी, लखनऊ, सुल्तानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर सहित अनेक जनपदों से हजारों अकीदतमंद काज़ीपुर पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ के चलते सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम किए गए थे। लोगों में उनके साथ तस्वीर लेने और करीब से देखने की भी जबरदस्त उत्सुकता दिखाई दी।
इस अवसर पर साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी, राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान, ग्राम प्रधान मोहम्मद उमर, पूर्व प्रधान मोहम्मद अहमद, भारतीय किसान यूनियन के जिला संगठन मंत्री डॉ. लल्लन, बहेरा सादात के पूर्व प्रधान ताज आब्दी, मुहाफिज आब्दी, जुबैर अहमद, दानिश, इलियास, तन्नू, मुस्तकीम, ताहा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने मुख्य अतिथि सैय्यद अमीर हसन आमिर का माल्यार्पण एवं स्मृति चिह्न भेंट कर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। स्वयंसेवकों ने भी भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और अज़ादारों की सुविधा के लिए सराहनीय भूमिका निभाई। देर रात तक चले इस धार्मिक आयोजन में नौहाख्वानी, मातम और मजलिस का सिलसिला लगातार जारी रहा। अंत में आयोजक सूफी मकसूद बाबा ने सभी अतिथियों, नौहाख्वानों, पुलिस प्रशासन, पत्रकारों तथा दूर-दराज़ से आए हजारों अकीदतमंदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कर्बला का पैग़ाम इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और हक़ के लिए डटे रहने का संदेश देता है। उन्होंने सभी से इस संदेश को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। विश्वविख्यात नौहाख्वान सैय्यद अमीर हसन आमिर की मौजूदगी और हजारों अज़ादारों की भागीदारी ने इस वर्ष काज़ीपुर के बीसवां को एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का स्वरूप प्रदान कर दिया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक क्षेत्र में होती रहेगी।
इनसेट बॉक्स
कौन हैं नौहाख्वान सैय्यद अमीर हसन आमिर
विश्विख्यात नौहा ख्वान सैय्यद अमीर हसन आमिर, लखनऊ, इंडिया में पैदा हुए। टी-सीरीज के तहत उनकी पहली सीडी “आग पे मातम” (1998) ने नौहा ख्वानी में एक मील का पत्थर साबित किया, जिसमें उनका ज़बरदस्त टैलेंट दिखा। आमिर AHA Records के फाउंडर हैं, जहाँ उन्होंने सुनने में दिक्कत वाले और गूंगे अज़ादारों के लिए नोहा बनाने में सबसे आगे रहकर इस फील्ड में इतिहास रचा।
2004 से, सैय्यद अमीर हसन आमिर अज़ादारी के एक जाने-माने ग्लोबल एंबेसडर रहे हैं, जो इमाम हुसैन (अ.स.) का संदेश फैलाने के लिए बहुत ज़्यादा यात्रा करते हैं। उन्हें 2007 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अंसारी ऑडिटोरियम में अयातुल्ला अकील-उल-घरवी से सफीर-ए-अज़ा अवॉर्ड मिला। दुनिया के जाने-माने विद्वानों की मौजूदगी में दिया गया यह सम्मान, नोहा ख्वानी की कला पर उनके गहरे असर को दिखाता है। सैय्यद अमीर हसन आमिर की यह कहावत, “कभी महफ़िल कभी अज़ा-ए-हुसैन ज़िंदगी वक़्फ़ है बराए हुसैन” (अ.स.)। इमाम हुसैन (अ.स.) और त्याग और भक्ति के सिद्धांतों के प्रति उनकी ज़िंदगी भर की लगन और समर्पण को दिखाती है। वह शांति और सांस्कृतिक लीडरशिप का संदेश फैलाने की कोशिश करते हैं। उनके हर एक नौहे लोगों के दिलों में सीधे असर करते हैं।


