फतेहपुर जनपद के असोथर क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
मार्च के तीसरे सप्ताह से अचानक बदले मौसम के रुख ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं, जिसका असर अप्रैल माह में भी लगातार देखने को मिल रहा है।
बेमौसम बारिश, तेज आंधी और बादलों की आवाजाही ने खेती-किसानी को सबसे अधिक प्रभावित किया है।
इस अवधि में जब किसान गेहूं, लाही, सरसों और चना जैसी रबी फसलों की कटाई और मड़ाई में जुटे थे, तभी बारिश और आंधी ने खेतों में भारी नुकसान कर दिया। कई स्थानों पर कटी फसलें खेतों में ही भीग गईं, जिससे दाने अंकुरित होने और गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
वहीं खड़ी फसलें गिरने से कटाई में अतिरिक्त खर्च और समय लगने की समस्या भी सामने आई है।
किसानों का कहना है कि मौसम की इस अनिश्चितता ने उनकी सारी योजना चौपट कर दी है।
मार्च के अंत तक जहां किसान कटाई-मड़ाई पूरी करने की उम्मीद कर रहे थे, वहीं अप्रैल की शुरुआत में भी बारिश और हवाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा।
इससे अनाज सुरक्षित रखने, भंडारण और बाजार तक पहुंचाने में भी दिक्कतें बढ़ गई हैं।
असोथर सहित पूरे क्षेत्र में किसानों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है। खेतों में मेहनत के बावजूद लाभ की जगह नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का शीघ्र सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए तथा आपदा राहत के अंतर्गत मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि मौसम की इस दोहरी मार से जूझ रहे अन्नदाताओं को राहत मिल सके।


