👉 बहुआ नगर पंचायत में गरीबों के आशियाने पर कथित वसूली का तंत्र बेनकाब
👉 सर्वेयर–सभासद पति की सांठगांठ से ‘आवास’ पर वसूली का जाल!
👉 15–20 हजार की मांग, सर्वे बना उगाही का हथियार
👉 डूडा सर्वेयर और वार्ड 8 के सभासद पति पर गरीबों से रकम वसूलने के आरोप
✍️ फतेहपुर। जनपद फतेहपुर की बहुआ नगर पंचायत में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित रूप से चल रहे वसूली तंत्र ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पात्र लाभार्थियों से प्रति आवास 15 से 20 हजार रुपये “सर्वे” के नाम पर लिए जा रहे हैं और यह सिलसिला महीनों से बेखौफ जारी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवास स्वीकृत कराने और किस्त निर्गत करवाने की प्रक्रिया को जटिल बताकर गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है। आरोपों के मुताबिक, वार्ड संख्या 8 से जुड़े एक जनप्रतिनिधि के परिजन और डूडा कार्यालय के एक सर्वेयर की कथित मिलीभगत से यह पूरा तंत्र संचालित हो रहा है। चर्चा यह भी है कि लाभार्थियों को स्पष्ट रूप से कहा जाता है कि “आवास चाहिए तो पहले चढ़ावा देना होगा”, अन्यथा किस्त रोकने या फाइल लंबित रखने की बात कही जाती है।कस्बे के एक दर्जन से अधिक लोगों ने गत माह जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत में यह उल्लेख किया गया है कि सर्वे प्रक्रिया को एक औपचारिकता न मानकर “लेन-देन का जरिया” बना दिया गया है। आरोपों के बीच एक कथित ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है, जिसे लोग इस नेटवर्क का प्रमाण बता रहे हैं। हालांकि, उक्त ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है , फिर भी इसकी सामग्री ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। सूत्र बताते हैं कि डूडा कार्यालय से जुड़े दो सर्वेयरों के नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं, जिनमें से एक का संबंध बहुआ ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत से बताया जा रहा है। आरोप यह भी है कि खबर सार्वजनिक होने के बाद संबंधित लोग दबाव, फोन कॉल और समझौते के प्रयासों में जुट गए। यह घटनाक्रम स्वयं इस बात की ओर संकेत करता है कि मामला साधारण प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि संगठित वसूली की आशंका का है।सबसे चिंताजनक पक्ष यह है कि योजना का उद्देश्य गरीबों को पक्का आशियाना उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि सर्वे की आड़ में आर्थिक शोषण का तंत्र सक्रिय है तो यह सीधे तौर पर जनहित के साथ छल है। लाभार्थियों का कहना है कि किस्त रोकने की धमकी से वे मानसिक और आर्थिक दबाव में आ जाते हैं और मजबूरन भुगतान करते हैं।प्रशासनिक जवाबदेही अब केंद्र में है। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल स्थानीय स्तर का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सरकारी योजना की साख पर आघात माना जाएगा। ऐसे में निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का परीक्षण और पारदर्शी कार्रवाई अत्यावश्यक हो जाती है।बहुआ नगर पंचायत का यह प्रकरण इस बात की परीक्षा है कि क्या व्यवस्था गरीबों के अधिकार की रक्षा के लिए खड़ी होगी या फिर योजनाओं के नाम पर पनप रहे अनौपचारिक तंत्र को अनदेखा किया जाएगा। जनपद की जनता अब ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक बिना किसी अवैध वसूली के पहुंचे और व्यवस्था में विश्वास बहाल हो।
👇 *बहुआ नगर पंचायत के तीन वर्षों के कथित भ्रष्टाचार की विस्तृत सार्वजनिक रिपोर्ट शीघ्र…पढ़ते रहिए हमारी खबरें — फतेहपुर की बहुआ नगर पंचायत से जुड़े हर परत-दर-परत खुलासे आपके सामने लाए जाएंगे ।


