बेमौसम बारिश और आंधी से किसानों की टूटी कमर, गेहूं की फसल को भारी नुकसान
महेश चक्रवर्ती असोथर (फतेहपुर)।
जनपद के असोथर क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मार्च के तीसरे सप्ताह से अचानक बदले मौसम के रुख ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिसका असर अप्रैल माह में भी लगातार देखने को मिल रहा है। बेमौसम बारिश, तेज आंधी और बादलों की आवाजाही ने खेती-किसानी को सबसे अधिक प्रभावित किया है।
इस समय जब किसान गेहूं, लाही, सरसों और चना जैसी रबी फसलों की कटाई और मड़ाई में जुटे थे, तभी लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में भारी नुकसान पहुंचा दिया। कई स्थानों पर कटी हुई फसलें खेतों में ही भीग गईं, जिससे दाने अंकुरित होने और काला पड़ने की आशंका बढ़ गई है, वहीं गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
असोथर कस्बे सहित पूरे ब्लॉक क्षेत्र में बीते तीन दिनों से देर शाम मौसम बिगड़ रहा है। आंधी-तूफान के साथ हो रही बारिश से खड़ी गेहूं की फसल गिर गई है, जिससे कटाई में अतिरिक्त समय और लागत बढ़ गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे ब्लॉक क्षेत्र में अब तक करीब 10 प्रतिशत ही गेहूं की कटाई हो सकी है, जबकि लगभग 90 प्रतिशत फसल की कटाई और मड़ाई का कार्य अभी बाकी है।
किसानों का कहना है कि मौसम की इस अनिश्चितता ने उनकी पूरी योजना चौपट कर दी है। पहले से ही मंडी समितियों में फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे किसान खुले बाजार में औने-पौने दामों में अपनी उपज बेचने को मजबूर होते हैं। अब ऊपर से बारिश और आंधी के कारण फसल को नुकसान होने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
क्षेत्र के किसान बाबू सिंह यादव, हरेंद्र निषाद, रामसुमेर मौर्य, दिलीप तिवारी, अनिरुद्ध मौर्य, सुशील और रामेंद्र मौर्य सहित अन्य किसानों ने बताया कि खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलें प्रभावित हुई हैं। मेहनत और लागत के बावजूद नुकसान की आशंका से किसानों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का शीघ्र सर्वे कराकर नुकसान का सही आकलन किया जाए और आपदा राहत के अंतर्गत उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि इस विपरीत मौसम की मार झेल रहे अन्नदाताओं को राहत मिल सके।


