👉चकइटौली में ‘जांच दर जांच’, कार्रवाई अब भी गायब!
👉सड़क, नाली, हैंडपंप में गड़बड़ी उजागर—आदेश कागजों में कैद
✍️ फतेहपुर। बहुआ ब्लॉक की चकइटौली ग्राम पंचायत में विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल अब गहराते जा रहे हैं। दो बार जांच के बाद तीसरी बार अफसरों की टीम गांव पहुंची, लेकिन हालात में बदलाव के बजाय अनियमितताओं की परतें और खुलती नजर आईं।सड़क, नाली और हैंडपंप मरम्मत कार्यों की मौके पर जांच के दौरान दो सड़कों में ही अनियमितताएं सामने आ गईं, जबकि नाली निर्माण और हैंडपंप कार्यों में भी लापरवाही पाई गई। समाज कल्याण अधिकारी अवनीश यादव के नेतृत्व में टीम ने जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपने की बात कही है।
❓ आदेशों का ‘हवामहल’, कार्रवाई अब भी दूर दिसंबर माह में लोकपाल जांच के दौरान आवास योजना में कथित रूप से 20–25 हजार रुपये की वसूली और मनरेगा मजदूरी न मिलने की शिकायतें सामने आई थीं। मामले में रिकवरी और मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नहीं दिखी।
ग्रामीणों में इसे लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि“जांच होती है, लेकिन कार्रवाई का कहीं अता-पता नहीं होता।” सिस्टम पर सवाल—जांच या सिर्फ औपचारिकता? चकइटौली में बार-बार जांच के बावजूद परिणाम न निकलना कई सवाल खड़े कर रहा है—
क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?क्या जिम्मेदारों पर किसी प्रकार का दबाव या संरक्षण काम कर रहा है?या फिर फाइलों में ही कार्रवाई सीमित हो रही है?गांव में यह भी चर्चा है कि वित्तीय लेन-देन और कागजी प्रक्रियाओं को लेकर कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
👉 ग्रामीण बोले—“हमें जांच नहीं, न्याय चाहिए स्थानीय लोगों का आरोप है कि योजनाओं का लाभ पात्रों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा। एक ग्रामीण ने कहा —अगर सब कुछ ठीक है तो बार-बार जांच क्यों हो रही है, और अगर गड़बड़ी है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
❗ भरोसे की परीक्षा में प्रशासन चकइटौली का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली और पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।लगातार जांच और कार्रवाई के अभाव ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—क्या इस बार जांच के बाद जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी या फिर मामला पहले की तरह कागजों में सिमट जाएगा।


