फतेहपुर। खागा तहसील अंतर्गत किशनपुर कस्बा से बांदा जनपद जोड़ने वाले दांदो यमुना पुल पर इन दिनों अंतरजनपदीय अवैध परिवहन का सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है। आरोप है कि बांदा जनपद की मोरंग खदानों से निकलने वाले सैकड़ों ओवरलोड अवैध वाहन यमुना पुल के रास्ते फतेहपुर जिले में प्रवेश कर रहे हैं और इसके पीछे सक्रिय लोकेटर सकरी का पूरा नेटवर्क काम कर रहा है।
जानकारी के अनुसार यह अवैध परिवहन शाम ढलते ही तेज हो जाता है। शाम 7 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक मोरंग से लदे सैकड़ो ओवरलोड ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली किशनपुर–खागा मार्ग पर खुलेआम तांडव मचाते हैं। इन वाहनों में अधिकांश बिना खनन प्रपत्र, बिना फिटनेस और बिना वैध दस्तावेजों के दौड़ रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बांदा जिले की मोरंग खदानों से फतेहपुर तक अवैध परिवहन को निर्बाध रूप से पास कराने में ‘लोकेटर सकरी’ की अहम भूमिका है। यह लोकेटर नेटवर्क अधिकारियों के आने-जाने, चेकिंग और संभावित कार्रवाई की सूचनाएं पल-पल ड्राइवरों तक पहुंचाता है, जिससे अवैध वाहन समय बदलकर, रास्ता बदलकर आसानी से बच निकलते हैं।
सूत्रों के मुताबिक अधिकतर लोकेटर बांदा जनपद के बीरा मोड़ से लेकर किशनपुर-दांदो के पास रारी मोड़, वहीं विजयीपुर चौराहा से खागा तक सक्रिय रहते हैं। यही लोकेटर अंतर्जनपदीय अवैध परिवहन को संरक्षण और बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं, जिससे पूरा तंत्र बेलगाम हो चुका है।
हालात इतने गंभीर हैं कि किशनपुर थाना परिसर से चंद कदमों की दूरी पर भी ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन बेखौफ जारी है। कई वाहनों की नंबर प्लेट पर कालिख पोत दी जाती है, जबकि कई वाहन बिना नंबर प्लेट के ही परिवहन करते पाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय पुलिस की सख्ती भी इस संगठित नेटवर्क के सामने बेअसर साबित हो रही है। खनन विभाग जहां कार्रवाई की बात करता है, वहीं परिवहन विभाग और राजस्व विभाग की रहस्यमयी चुप्पी पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।
अवैध परिवहन से जहां सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं सड़क सुरक्षा, आम नागरिकों की जान और कानून व्यवस्था भी लगातार खतरे में डाली जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस ‘लोकेटर सकरी’ नेटवर्क को तोड़ पाएगा, या फिर दांदो यमुना पुल ऐसे ही अवैध परिवहन का गढ़ बना रहेगा?


