आज दिल्ली के गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब जी में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य तौर पर जगजीत सिंह डल्लेवाल (पंजाब), पी. आर. पांड्यन (तमिलनाडु), सतनाम सिंह बेहरु (पंजाब), अभिमन्यु कोहाड़ (हरियाणा), इंदरजीत सिंह पन्नीवाला (राजस्थान), संदीप सिंह केरा (राजस्थान), अनिल तालान (उत्तर प्रदेश), राजबीर सिंह (उत्तर प्रदेश), सोनबीर सिंह (उत्तर प्रदेश), नितिन बाल्यान (उत्तर प्रदेश), जितेंद्र शर्मा (उत्तर प्रदेश), हरसुलिन्दर सिंह (पंजाब), अरुण पटेल (मध्यप्रदेश), राजेश धाकड़ (मध्य प्रदेश), वेंकेटेश्वर राव (तेलंगाना), सोनू औलख (पंजाब), सतनाम सिंह बगड़िया (पंजाब), गजेंद्र सिंह झाला (गुजरात), राजेन्द्र सिंह खालसा (उत्तर प्रदेश) आदि ने भाग लेंगे।
बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए –
1). MSP गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट, किसानों की कर्ज़मुक्ति समेत खेती-किसानी की तमाम मांगों को पूरा करवाने के लिए फरवरी के पहले सप्ताह में कन्याकुमारी से कश्मीर के लिए किसान यात्रा शुरू करी जाएगी जिसका समापन 19 मार्च को नई दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में विशाल किसान महापंचायत कर के किया जाएगा। यात्रा के दौरान देशभर में किसान पंचायतों का आयोजन किया जाएगा एवम देशभर में लाखों गाँवों से किसानी मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पारित करवाये जाएंगे जिन्हें 19 मार्च को माननीय प्रधानमंत्री जी को सौंपा जाएंगे।
2). आज संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने सर्वसम्मति से जगजीत सिंह डल्लेवाल जी को राष्ट्रीय संयोजक, क़ुर्बुरु शांताकुमार जी को राष्ट्रीय सह-संयोजक, हर्षदीप सिंह को राष्ट्रीय सचिव एवम महावीर सहारण को राष्ट्रीय सह-सचिव की जिम्मेदारी दी है।
3). कल 9 जनवरी को पंचकुला में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) का राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी से कृषि विषयों पर मुलाकात करेगा, उसके बाद आने वाले दिनों में यह प्रतिनिधिमंडल माननीय संसद की कृषि के विषयों पर बनी स्थायी समिति से भी कृषि विषयों पर मुलाकात करेगा।
4). किसान नेताओं ने बताया कि कृषि मंत्री जी ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि “हर वर्ष फसलों की पैदावार बढ़ रही है, इसका अर्थ है कि किसान खुशहाल हैं” लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, किसान नेताओं ने बताया कि किसान कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं, कर्ज़ चुकाने के लिए किसानों को मजबूरी में अधिक उर्वरकों का इस्तेमाल कर के एवम आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर के पैदावार बढ़ानी पड़ रही है क्योंकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है एवम किसानों को मिलने वाले फसलों के दाम लगातार घट रहे हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि कर्ज़ के जाल से बाहर निकलने के लिए किसानों को मजबूरी में पैदावार बढ़ानी पड़ रही है।
सधन्यवाद
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)
8950456616 ।। भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अनिल तालान – 9068401963
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